ओजस्वी पार्टी का स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती पर राष्ट्र के नाम सन्देश !

ओजस्वी पार्टी का स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती पर राष्ट्र के नाम सन्देश !

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ओजस्वी पार्टी का स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती पर राष्ट्र के नाम सन्देश

जब परदेसी भाषा, परदेसी आहार व्यवहार और परदेसी शिक्षण का बोलबाल और वाहवाही चलने लगी, जब देश परदेस का घुलाम बन गया तब महात्मा गांधीजी के संकल्प से देशभर में राष्ट्रीय शिक्षक और स्वदेशी व्रत के प्रचारक बने स्वामी दयान्द सरस्वतीजी.

सन 1823 के माघ मस में उनका जन्म हुआ. उनको पूरे देश की गरीबी, अंधश्रद्धा, गन्दगी, वेह्मो, कुरिवाजों को देख कर सदमा लगा. उसके बाद जीवन के कई वर्षों तक उन्होंने तपस्या की. मथुरा में स्वामी विरजानंद ने उनको विधा शिक्षा दी. गुरुदक्षिना मांगते समय उन्होंने कहा “अपना देश आज कंगाल बन चूका है. वेह्मो और कुरिवाजों के कारण देश को भारी नुक्सान हुआ है. तू उनको वेड, धर्म व्यव्हार धर्म सिखा. ये मेरी गुरुदक्षिना है.

इक्यावन वर्ष की उम्र में उन्होंने आर्य समाज की स्थापना की. उसमें हिन्दू धर्म, संस्कार, पूजा, यज्ञ, संस्कृत का शिक्षण मिल सके ऐसी व्यवस्था की. देश भर में उसकी सैकड़ों शाखाएं हैं. हिंदी भाषा को गौरव दिलवाया. चारो वेदों का भाषांतर – सत्यार्थ प्रकाश – लिखा.

समाज सुधार एवं अस्पष्टता निवारण हेतु उन्होंने बहुत सारे कार्य किये. मर्यादित लोगों में ही नहीं परन्तु नीची जाति के दलित पीड़ित लोगों के बीच भी हिन्दू धर्म को ले गये. जब वेदों का प्रचार कहीं था ही नहीं तब उन्होंने वेदों को घर घर पहुंचाया.

आर्य समाज शाहीबाग महेश्वरी समाज में हर सत्य वेड उपनिषद् पर लोकाभिमुख को पेश किया और कर रहे हैं. आर्य कन्या विद्यालय में से हर साल वेदों के ऊपर सुन्दर व्याख्यान पेश किये जाते हैं.

स्वदेशी व्रत प्रतिज्ञा.

हम मातृभूमि का पवित्र स्मरण करके ये प्रतिज्ञा करते हैं कि जब तक स्वदेशी चीज़ वास्तु मिलेगी तब तक विदेशी चीज़ें नहीं खरीदेंगे. चाहे वो भाषा हो, आहार हो, वस्त्र हो या शिक्षण. हम स्वदेशी व्रत प्रतिज्ञा लेते हैं.

परदेसी शिक्षण नहीं अपितु राष्ट्रीय शिक्षण प्राप्त करेंगे. हर एक देशवासी अपने देशवासियों से अपनी मातृभाषा में बात करेगा.

परदेशी भाषा, आहार, वस्त्र, व्यव्हार को तिलांजलि देकर अपनी मातृभूमि व्रत का पालन करेंगे.
ओजस्वी पार्टी

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